Sunday, 16 October 2022

हिन्दी भाषा के बारे में कुछ तथ्य

क्या तुम्हें पता है:-

·        हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।  हिंदी या जिसे आधुनिक मानक हिंदी के रूप में जाना जाता है, एक इंडो-आर्यन भाषा है।  हिंदी उर्दू के साथ हिंदुस्तानी का एक मानकीकृत रूप है।  हिंदी और उर्दू में महत्वपूर्ण समानताएं हैं लेकिन उन्हें अभी भी हिंदुस्तानी के दो रूप माना जाता है।

·        भारत के बाहर, कई अन्य भाषाओं को भी हिंदी के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन मानक हिंदी नहीं हैं।  हिंदी न केवल भारत में बल्कि मॉरीशस, फिजी, गुयाना, नेपाल, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे कई अन्य स्थानों में भी बोली जाती है।

·        अंग्रेजी ने हिंदी से कई अलग-अलग शब्द उधार लिए हैं।  कुछ उदाहरणों में अवतार, शैम्पू, पायजामा, शर्बत, योग, कर्म, गुरु, निर्वाण, जंगल शामिल हैं।

·        हिंदी में प्रत्येक अक्षर की अपनी स्वतंत्र और विशिष्ट ध्वनि होती है।  इसलिए, हिंदी के शब्दों का उच्चारण वैसे ही किया जाता है जैसे वे लिखे जाते हैं।  दुनिया में हर संभव ध्वनि को आसानी से हिंदी में लिखा जा सकता है।  आधुनिक देवनागरी लिपि 11वीं शताब्दी में अस्तित्व में आई।

·        वर्ष 1881 में, बिहार ने अपनी भाषा को उर्दू से हिंदी में बदल दिया और राज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया।

·        हिंदी में हर संज्ञा का अपना लिंग होता है।  सभी हिंदी संज्ञाओं में लिंग होते हैं।  सभी क्रिया और विशेषण भी लिंग के अनुसार बदलते हैं।  हिंदी ‘ए’, ‘ए’ और ‘द’ जैसे लेखों से भी मुक्त है।

·        फारस और अरबी के कई शब्द हिंदी से लिए गए हैं।

·        पहला हिंदी टाइपराइटर 1930 में बाजार में आया।

·        हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है।  भारत की कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है लेकिन हिंदी और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा माना जाता है।

·        हिंदी में एक तरह की वाक्य संरचना है।

·        महात्मा गांधी वह थे जिन्होंने लोगों को स्वतंत्रता के दौरान सामूहिक आवाज और विरोध और संचार की भाषा के रूप में हिंदी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया और इसलिए इसे एकता की भाषा माना जाता है।

·        बोली जाने वाली हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है।  इसके क्षेत्रीय रूप हैं जैसे मानक हिंदी, नागरी हिंदी, साहित्यिक हिंदी और उच्च हिंदी।

 ये हिंदी भाषा के कुछ तथ्य हैं।

 


 

Did you know

·        Hindi is one of the most spoken languages in the world. Hindi or precisely known as the modern standard Hindi is an Indo-Aryan language. Hindi is a standardized form of Hindustani along with Urdu. Hindi and Urdu share significant similarities but they are still considered to be two variants of Hindustani.

·        Outside India, several other languages are also recognized as Hindi but are not standard Hindi. Hindi is not only spoken in India but also in many other places like Mauritius, Fiji, Guyana, Nepal, Trinidad and Tobago.

·        English has borrowed many different words from Hindi. Some of the examples include avatar, shampoo, pyjama, sorbet, yoga, karma, guru, nirvana, jungle.

·        Each letter in Hindi has its independent and distinct sound. Hence, Hindi words are pronounced as they are written. Every possible sound in the world can be easily written in Hindi. The modern Devanagari script came into existence in the 11th century.

·        In the year 1881, Bihar changed its language from Urdu to Hindi and became the first state in India to adopt Hindi as an official language of the state.

·        In Hindi, every noun has its gender. All Hindi nouns have genders. All verbs and adjectives also change according to gender. Hindi is also free of articles like ‘a’, ‘an’ & ‘the’.

·        Many words from Persia and Arabic are taken from Hindi.

·        The first Hindi typewriter came to market in 1930.

·        Hindi is not the National language of India. India does not have a National language but Hindi and English are considered as official languages.

·        Hindi has a one of a kind sentence structure.

·        Mahatma Gandhi was the one who encouraged people to use Hindi as a collective voice during the Independence and the language of protest and communication and hence is considered as the language of unity.

·        Spoken Hindi is not just one language. It has its regional variants such as standard Hindi, Nagari Hindi, literary Hindi and high Hindi.

These are some of the facts of the Hindi language.

 


 

 

کیا آپ جانتے ہیں؟

 ہندی دنیا میں سب سے زیادہ بولی جانے والی زبانوں میں سے ایک ہے۔  ہندی یا بالکل جدید معیاری ہندی کے نام سے جانا جاتا ہے ایک ہند آریائی زبان ہے۔  ہندی اردو کے ساتھ ہندوستانی کی ایک معیاری شکل ہے۔  ہندی اور اردو میں نمایاں مماثلت پائی جاتی ہے لیکن انہیں اب بھی ہندوستانی کی دو شکلیں سمجھا جاتا ہے۔

 ہندوستان سے باہر، کئی دوسری زبانیں بھی ہندی کے طور پر پہچانی جاتی ہیں لیکن معیاری ہندی نہیں ہیں۔  ہندی نہ صرف ہندوستان میں بولی جاتی ہے بلکہ ماریشس، فجی، گیانا، نیپال، ٹرینیڈاڈ اور ٹوباگو جیسے کئی دیگر مقامات پر بھی بولی جاتی ہے۔

 انگریزی نے ہندی سے بہت سے مختلف الفاظ مستعار لیے ہیں۔  کچھ مثالوں میں اوتار، شیمپو، پائجاما، شربت، یوگا، کرما، گرو، نروان، جنگل شامل ہیں۔

 ہندی میں ہر حرف کی اپنی آزاد اور الگ آواز ہوتی ہے۔  اس لیے ہندی کے الفاظ لکھے جانے کے ساتھ ہی تلفظ کیے جاتے ہیں۔  دنیا کی ہر ممکنہ آواز کو آسانی سے ہندی میں لکھا جا سکتا ہے۔  جدید دیوناگری رسم الخط 11ویں صدی میں وجود میں آیا۔

 سال 1881 میں، بہار نے اپنی زبان اردو سے ہندی میں تبدیل کی اور ہندی کو ریاست کی سرکاری زبان کے طور پر اپنانے والی ہندوستان کی پہلی ریاست بن گئی۔

 ہندی میں ہر اسم کی اپنی جنس ہوتی ہے۔  تمام ہندی اسموں کی جنس ہوتی ہے۔  تمام فعل اور صفت بھی جنس کے مطابق بدلتے ہیں۔  ہندی بھی 'a'، 'an' اور 'the' جیسے مضامین سے پاک ہے۔

 فارسی اور عربی کے بہت سے الفاظ ہندی سے لیے گئے ہیں۔

 پہلا ہندی ٹائپ رائٹر 1930 میں مارکیٹ میں آیا۔

 ہندی ہندوستان کی قومی زبان نہیں ہے۔  ہندوستان کی کوئی قومی زبان نہیں ہے لیکن ہندی اور انگریزی کو سرکاری زبانیں سمجھا جاتا ہے۔

 ہندی میں جملے کی ساخت ایک طرح کی ہے۔

 مہاتما گاندھی ہی تھے جنہوں نے آزادی کے دوران لوگوں کو ہندی کو ایک اجتماعی آواز کے طور پر استعمال کرنے اور احتجاج اور رابطے کی زبان کے طور پر استعمال کرنے کی ترغیب دی اور اسی لیے اسے اتحاد کی زبان سمجھا جاتا ہے۔

 بولی جانے والی ہندی صرف ایک زبان نہیں ہے۔  اس کی علاقائی شکلیں ہیں جیسے معیاری ہندی، نگری ہندی، ادبی ہندی اور اعلی ہندی۔

 یہ ہندی زبان کے چند حقائق ہیں۔

Friday, 23 September 2022

मेरा प्रेम

नि:संदेह मेरी "स्नेह".....
मेरा प्रेम, मेरा स्नेह...
गंगा जल की तरह नहीं तो....
घर में रखे मिट्टी के घड़े सा...
निर्मल, पारदर्शी, शीतल....
स्वाद चाहे नहीं दे पाए....
तृप्त अवश्य करने को तत्पर...
नि:संदेह....
मुझमें बसने वाली आत्मा हो तुम.....
और अगर नही है विश्वास....
मेरी बातों में छुपी सच्चाई पर....
तो बस एक बार....
महसूस करना....
कैसा निष्प्राण हो जाता हूं मैं....
बस एक हल्के से...
तुम्हारे रूठ जाने से....
और लौट आती हैं....
धड़कनें, सांसें और जरा सी....
मुस्कुराहट भी....
बस तुम्हारे मुस्कुरा भर देने से....
❤️

Wednesday, 21 September 2022

कसक

सिर्फ तुम्हीं नहीं...
मुझे प्यारा लगता है,
तुमसे जुड़ा हर नाम....
तुमसे जुड़ा हर शख्स....
चाहे फिर वो कोई भी हो....
चाहे तुम्हारे सगे संबंधी....
चाहे तुम्हारे मीत या सखा..
चाहे वो जिन्हे तुम सिर्फ जानती भर हो....
चाहे वो जो तुम्हें पहचानते भर हो....
चाहे वो जो तुम्हें चाहते हो....
या चाहे वो जिन्हें तुम चाहती हो....
उन सभी से बन जाता है...
अनजाने ही...
मेरा भी एक खास रिश्ता....
कुछ भी शिकवा...
कोई भी शिकायत नहीं होती मुझे....
उन सभी नामों से...
उन सारे रिश्तों से....
उस किसी भी शख्स से....
बस जल उठता हूं मैं...
तड़प उठता हूं....
एक असहनीय पीड़ा लिए....
तभी, जब पाता हूं.....
उन्हें तुम्हारे दिल के करीब....
और अपने आप को.....
तुम्हारे मन से दूर.....
.

काश..!

काश..!
तुमने देखी होती....
कुछ पानी की बूंदें....
मेरी पलकों पर....
काश..!
तुमने देखी होती....
मेरी कामयाब कोशिशें....
जो रोक पाई उन बूंदों को....
छलक जाने से....
ताकि भीग न जाए वो कागज़....
या फिर तुम कहीं पिघल न जाओ....
फिर एक बार ....
.

Saturday, 10 October 2020

स्त्री, ईश्वर की महान कृति

स्त्री तुम
पुरुष न हो पाओगी....

ज्ञान की तलाश क्या 
सिर्फ बुद्ध को थी?
क्या तुम नहीं पाना चाहती 
वो ज्ञान?

किन्तु जा पाओगी,
अपने पति परमेश्वर
और नवजात शिशु 
को छोड़कर....

तुम तो उनपर 
जान लुटाओगी....
उनके लिये अपने भविष्य को 
दाँव पर लगाओगी...
उनकी होठों की
एक मुस्कुराहट के लिए
अपनी सारी खुशियों की 
बलि चढ़ाओगी....

स्त्री तुम
पुरुष न हो पाओगी....

क्या राम बन पाओगी????
क्या कर पाओगी 
अपने पति का परित्याग,
उस गलती के लिए 
जो उसने की ही नहीं????

ले पाओगी 
उसकी अग्निपरीक्षा
उसके नाज़ायज़ सम्बधों 
के लिए भी????

क्षमा कर दोगी उसकी 
गलतियों के लिए,
हज़ार गम पीकर भी मुस्कुराओगी....

स्त्री तुम
पुरुष न हो पाओगी....

क्या कृष्ण बन पाओगी????
जोड़ पाओगी अपना नाम 
किसी परपुरुष के साथ????

जैसे कृष्ण संग राधा....
अगर तुम्हारा नाम जुड़ा....
तो तुम चरित्रहीन कहलाओगी....
तुम मुस्कुराकर 
बात भी कर लोगी,
तो भी कलंकिनी 
कुलटा कहलाओगी....

स्त्री तुम
पुरुष न हो पाओगी........

क्या युधिष्ठिर बन पाओगी????
जुए में पति को 
हार जाओगी?????
तुम तो उसके 
सम्मान की खातिर,
दुर्गा चंडी हो जाओगी...
खुद को कुर्बान कर जाओगी......
मौत भी आये तो ,
उसके समक्ष 
अभय खड़ी हो जाओगी।

स्त्री तुम
पुरुष न हो पाओगी.......

रहने दो तुम
ये सब...क्योंकि...

तुम सबल हो,
तुम सरल हो,
तुम सहज हो,
तुम निश्चल हो,
तुम निर्मल हो,
तुम शक्ति हो,
तुम जीवन हो,
तुम प्रेम ही प्रेम हो,

ईश्वर की अद्भुत सुंदरतम
कृति हो तुम....

 "स्त्री हो तुम"

Wednesday, 22 July 2020

A letter to my elder son on his 18th birthday

Dear Praneh,
As you are turning 18 today,
I wish a lot many things...
Sometimes, I wish, you were still small,
Not so big and strong and tall,
'Cause when I think of yesterday,
I close my eyes and I still see you play,
I often miss my little boy, 
Who sometimes pestered me to buy a toy,
Who filled my days with pure delight,
From early morning to late night,
Today too dear, I am proud of you,
For all the thoughtful things you do,
I love you no matter what you do,
I may not like it, 
We may argue and disagree but,
I'll love you till my days are done,
And yeah.! I am so grateful that you are my son....
Now today on your 18th Birthday,
I wish you the strength to face challanges with confidence,
Along with the wisdom to choose your battles carefully,
I wish you the adventure on your journey..
But still the tenderness to stop,
To help someone along the way..
Listen to your heart and take risks carefully...
Always remember how much you are loved...
And we all are proud of you betu...
Many happy returns of the day and a great birthday Praneh.... 
😘💋

Wednesday, 21 August 2019

एक गोत्र में शादी क्यों वर्जित है

*-: एक गोत्र में शादी क्यों वर्जित है :-*

*पिता का गोत्र पुत्री को प्राप्त नही होता। अब एक बात ध्यान दें की स्त्री में गुणसूत्र xx होते है और पुरुष में xy होते है। इनकी सन्तति में माना की पुत्र हुआ (xy गुणसूत्र). इस पुत्र में y गुणसूत्र पिता से ही आया यह तो निश्चित ही है क्यू की माता में तो y गुणसूत्र होता ही नही !*
*और यदि पुत्री हुई तो (xx गुणसूत्र). यह गुण सूत्र पुत्री में माता व् पिता दोनों से आते है।*

*१. xx गुणसूत्र ;- xx गुणसूत्र अर्थात पुत्री . xx गुणसूत्र के जोड़े में एक x गुणसूत्र पिता से तथा दूसरा x गुणसूत्र माता से आता है . तथा इन दोनों गुणसूत्रों का संयोग एक गांठ सी रचना बना लेता है जिसे Crossover कहा जाता है।*

*२. xy गुणसूत्र ;- xy गुणसूत्र अर्थात पुत्र . पुत्र में y गुणसूत्र केवल पिता से ही आना संभव है क्यू की माता में y गुणसूत्र है ही नही । और दोनों गुणसूत्र असमान होने के कारन पूर्ण Crossover नही होता केवल ५ % तक ही होता है । और ९ ५ % y गुणसूत्र ज्यों का त्यों (intact) ही रहता है।*

*तो महत्त्वपूर्ण y गुणसूत्र हुआ । क्यू की y गुणसूत्र के विषय में हम निश्चिंत है की यह पुत्र में केवल पिता से ही आया है। बस इसी y गुणसूत्र का पता लगाना ही गौत्र प्रणाली का एकमात्र उदेश्य है जो हजारों/लाखों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों ने जान लिया था।*

*वैदिक गोत्र प्रणाली और y गुणसूत्र। Y Chromosome and the Vedic Gotra System*
*अब तक हम यह समझ चुके है की वैदिक गोत्र प्रणाली य गुणसूत्र पर आधारित है अथवा y गुणसूत्र को ट्रेस करने का एक माध्यम है।*

*उदहारण के लिए यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है तो उस व्यक्ति में विधमान y गुणसूत्र कश्यप ऋषि से आया है या कश्यप ऋषि उस y गुणसूत्र के मूल है।*
*चूँकि y गुणसूत्र स्त्रियों में नही होता यही कारन है की विवाह के पश्चात स्त्रियों को उसके पति के गोत्र से जोड़ दिया जाता है।*

*वैदिक/ हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित होने का मुख्य कारन यह है की एक ही गोत्र से होने के कारन वह पुरुष व् स्त्री भाई बहिन कहलाये क्यू की उनका पूर्वज एक ही है। परन्तु ये थोड़ी अजीब बात नही? की जिन स्त्री व् पुरुष ने एक दुसरे को कभी देखा तक नही और दोनों अलग अलग देशों में परन्तु एक ही गोत्र में जन्मे , तो वे भाई बहिन हो गये।??*

*इसका एक मुख्य कारन एक ही गोत्र होने के कारन गुणसूत्रों में समानता का भी है । आज की आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार यदि सामान गुणसूत्रों वाले दो व्यक्तियों में विवाह हो तो उनकी सन्तति आनुवंशिक विकारों का साथ उत्पन्न होगी।*

*ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता।*
*ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है। विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात् मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था।*
*इस गोत्र का संवहन यानी उत्तराधिकार पुत्री को एक पिता प्रेषित न कर सके, इसलिये विवाह से पहले #कन्यादान कराया जाता है और गोत्र मुक्त कन्या का पाणिग्रहण कर भावी वर अपने कुल गोत्र में उस कन्या को स्थान देता है, यही कारण था कि विधवा विवाह भी स्वीकार्य नहीं था। क्योंकि, कुल गोत्र प्रदान करने वाला पति तो मृत्यु को प्राप्त कर चुका है।*

*इसीलिये, कुंडली मिलान के समय वैधव्य पर खास ध्यान दिया जाता और मांगलिक कन्या होने से ज्यादा सावधानी बरती जाती है। आत्मज़् या आत्मजा का सन्धिविच्छेद तो कीजिये।*
*आत्म+ज या आत्म+जा।  आत्म=मैं, ज या जा =जन्मा या जन्मी। यानी जो मैं ही जन्मा या जन्मी हूँ।*
*यदि पुत्र है तो 95% पिता और 5% माता का सम्मिलन है। यदि पुत्री है तो 50% पिता और 50% माता का सम्मिलन है। फिर यदि पुत्री की पुत्री हुई तो वह डीएनए 50% का 50% रह जायेगा, फिर यदि उसके भी पुत्री हुई तो उस 25% का 50% डीएनए रह जायेगा, इस तरह से सातवीं पीढ़ी मेंपुत्री जन्म में यह % घटकर 1% रह जायेगा।*

*अर्थात, एक पति-पत्नी का ही डीएनए सातवीं पीढ़ी तक पुनः पुनः जन्म लेता रहता है, और यही है सात जन्मों का साथ। लेकिन, जब पुत्र होता है तो पुत्र का गुणसूत्र पिता के गुणसूत्रों का 95% गुणों को अनुवांशिकी में ग्रहण करता है और माता का 5% (जो कि किन्हीं परिस्थितियों में एक % से कम भी हो सकता है) डीएनए ग्रहण करता है, और यही क्रम अनवरत चलता रहता है, जिस कारण पति और पत्नी के गुणों युक्त डीएनए बारम्बार जन्म लेते रहते हैं, अर्थात यह जन्म जन्मांतर का साथ हो जाता है।*
*इसीलिये, अपने ही अंश को पित्तर जन्मों जन्म तक आशीर्वाद देते रहते हैं और हम भी अमूर्त रूप से उनके प्रति श्रधेय भाव रखते हुए आशीर्वाद आशीर्वाद ग्रहण करते रहते हैं, और यही सोच हमें जन्मों तक स्वार्थी होने से बचाती है, और सन्तानों की उन्नति के लिये समर्पित होने का सम्बल देती है।*

*एक बात और, माता पिता यदि कन्यादान करते हैं, तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि वे कन्या को कोई वस्तु समकक्ष समझते हैं, बल्कि इस दान का विधान इस निमित किया गया है कि दूसरे कुल की कुलवधू बनने के लिये और उस कुल की कुल धात्री बनने के लिये, उसे गोत्र मुक्त होना चाहिये। डीएनए मुक्त हो नहीं सकती क्योंकि भौतिक शरीर में वे डीएनए रहेंगे ही, इसलिये मायका अर्थात माता का रिश्ता बना रहता है, गोत्र यानी पिता के गोत्र का त्याग किया जाता है। तभी वह भावी वर को यह वचन दे पाती है कि उसके कुल की मर्यादा का पालन करेगी यानी उसके गोत्र और डीएनए को करप्ट नहीं करेगी, वर्णसंकर नहीं करेगी, क्योंकि कन्या विवाह के बाद कुल वंश के लिये #रज् का रजदान करती है और मातृत्व को प्राप्त करती है। यही कारण है कि हर विवाहित स्त्री माता समान पूज्यनीय हो जाती है।*
*यह रजदान भी कन्यादान की तरह उत्तम दान है जो पति को किया जाता है।*

*यह सुचिता अन्य किसी सभ्यता में दृश्य ही नहीं है।*
*जय वेदिक सनातन की*