Friday, 26 June 2015

राघवयादवीयम् स्तोत्रम्

नमोSस्तु रामाय; नमो: केशवम्।

कांचीपुरम के 17वीं शती के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ ‘राघवयादवीयम्’ एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। इसमें केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और विपरीत क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक। उदाहरण के लिए देखें :

अनुलोम :
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ 1 ॥

विलोम :
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ 1 ॥

अनुलोम :
साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ 2 ॥

विलोम :
वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ 2 ॥

क्या ऐसा कुछ अंग्रेजी में रचा जा सकता है ??
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सम्पूर्ण स्तोत्र इस प्रकार है:-
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राघवयादवीयम्
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वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

विलोमम्
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥

विलोमम्
वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥

कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका ।
सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥

विलोमम्
भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा ।
कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥

रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् ।
नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥

विलोमम्
यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः ।
तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥

यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ ।
तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥

विलोमम्
तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं ।
सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥

मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं ।
काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥

विलोमम्
तेन रातमवामास गोपालादमराविका ।
तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥

रामनामा सदा खेदभावे दया-
वानतापीनतेजारिपावनते ।
कादिमोदासहातास्वभासारसा-
मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥

विलोमम्
मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-
सारसा भास्वताहासदामोदिका ।
तेन वा पारिजातेन पीता नवा
यादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥

सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया ।
साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥

विलोमम्
हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा ।
यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥

सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया ।
सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥

विलोमम्
सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा ।
यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥

तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा ।
यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥

विलोमम्
हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया ।
सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥

वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो ।
भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥

विलोमम्
सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः ।
होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥

यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे ।
सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥

विलोमम्
भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा ।
वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥

रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह ।
यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥

विलोमम्
नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया ।
हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥

यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् ।
सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥

विलोमम्
यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः ।
गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥

दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा ।
ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥

विलोमम्
नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः ।
हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥

सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् ।
तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥

विलोमम्
हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् ।
जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥

सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः ।
न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७॥

विलोमम्
तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन ।
सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥

तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत ।
वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥

विलोमम्
केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः ।
ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥

गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया ।
सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥

विलोमम्
हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस ।
यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥

हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः ।
राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥

विलोमम्
घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः ।
धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥

ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः ।
हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि ॥ २१॥

विलोमम्
विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा ।
ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥

भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥

विलोमम्
ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥

हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥

विलोमम्
योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥

भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥

विलोमम्
विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं ।
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥

हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि ।
राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥

विलोमम्
यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा ।
निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥

सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥

विलोमम्
जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥

वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः ।
तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥

विलोमम्
नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः ।
सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥

हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥

विलोमम्
हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥

नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका ।
रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥

विलोमम्
नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा ।
कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥

साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥
निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥

विलोमम्
भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।
गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥

॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं
श्री राघव यादवीयं समाप्तम् ॥

Thursday, 25 June 2015

Would it be such a loss?

Would it be such a loss ? 

● Would it be such a loss if I didn't read the newspaper at breakfast, 
And talked to my family instead...

● Would it be such a loss if didn't check my mobile every 10 seconds, 
And paid attention to my partner instead...

● Would it be such a loss if I didn't update each activity on Facebook, 
And updated my family about my day instead...

● Would it be such a loss if I didn't spend late nights at work, 
And read bedtime stories to my children instead...

● Would it be such a loss if I didn't attend a party, 
And had dinner at home with my parents instead...

● Would it be such a loss if I didn't stay up late net surfing,
And went for an early morning walk instead...

● Would it be such a loss if I didn't work out in the gym today 
And helped out with the housework instead...

● Would it be such a loss if I didn't what's app my best friend on his birthday, 
And turned up on his doorstep with a cake instead...

● Would it be such a loss if I did my colleague's work, 
And didn't care if he got the credit instead...

● Would it be such a loss if didn't talk on the phone while crossing the road,
And helped someone across instead...

● Would it be such a loss if I didn't care how I looked, 
And cared how I behaved instead...

● Would it be such a loss if I didn't do what I do each day,
And lived life just the way it's meant to be...

बाथरूम का वास्तु

घर में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने के लिए वास्तु के नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है। वास्तु के अनुसार बताए गए उपाय करने पर वातावरण सकारात्मक बनता है और मानिसक शांति प्राप्त होती है। यदि घर में वास्तु दोष होते हैं तो दरिद्रता और मानसिक परेशानियों के साथ ही वैवाहिक जीवन में भी दुखों का सामना करना पड़ सकता है। इन परेशानियों से बचने के लिए घर के सभी हिस्सों के लिए वास्तु में कई उपाय बताए गए हैं। यहां जानिए बाथरूम से जुड़े कुछ उपाय, जिनसे नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सकती है...

1. यदि आप अपने बाथरूम में एक कटोरी में खड़ा यानी साबूत नमक रखेंगे तो आपके घर के कई वास्तु दोष दूर हो जाएंगे। कटोरी में रखा नमक महीने में एक बार बदल लेना चाहिए। खड़ा नमक आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर लेता है और वातावरण को सकारात्मक बनाता है।

2. घर में बाथरूम का नल या किसी अन्य स्थान का नल लगातार टपकते रहता है तो यह बात छोटी नहीं है, वास्तु में इसे गंभीर दोष माना गया है। अत: नल से पानी टपकना बंद करवाना चाहिए।

3. यदि आपके बाथरूम में दर्पण लगा हुआ है तो इस बात का ध्यान रखें कि दर्पण दरवाजे के ठीक सामने न हो। जब-जब बाथरूम का दरवाजा खुलता है, तब-तब घर की नकारात्मक ऊर्जा बाथरूम में प्रवेश करती है। ऐसे समय पर यदि दरवाजे के ठीक सामने दर्पण होगा तो उस दर्पण से टकराकर नकारात्मक ऊर्जा पुन: घर में आ जाएगी।

4. 2-3 दिन में कम से कम एक बार पूरा बाथरूम अच्छी तरह साफ करना चाहिए। बाथरूम यदि एकदम साफ रहेगा तो इसका शुभ असर आपकी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। साफ-सफाई वाले घरों में देवी-देवताओं की विशेष कृपा रहती है।

5. इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बाथरूम और कमरे के फर्श के बीच में कुछ दूरी अवश्य हो। बाथरूम और कमरे के फर्श के बीच दूरी बनाने के लिए थोड़ी ऊंची दहलीज बनाई जा सकती है। जब बाथरूम का दरवाजा बंद रहेगा तब दहलीज के कारण दरवाजे के नीचे से भी नकारात्मक ऊर्जा कमरे में प्रवेश नहीं कर पाएगी।
6. बाथरूम में पानी का बहाव उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। यदि संभव हो तो बाथरूम घर के नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण दिशा) में बनवाना चाहिए। अगर ये संभव न हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में भी बाथरूम बनवाया जा सकता है।

7. गीजर आदि विद्युत उपकरण अग्नि से संबंधित हैं, अत: इन्हें बाथरूम के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में लगाएं। बाथरूम में एक बड़ी खिड़की व एक्जॉस्ट फैन के लिए अलग से रोशनदान होना चाहिए। बाथरूम में गहरे रंग की टाइल्स न लगाएं। हमेशा हल्के रंग की टाइल्स का उपयोग करें।

8. यदि बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में खुलता हो तो उसे खुला रखने से बचना चाहिए। वैसे तो बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, लेकिन बेडरूम में बाथरूम है तो उसके दरवाजे पर पर्दा भी लगाना चाहिए। बेडरूम और बाथरूम की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता।

Sunday, 21 June 2015

वृद्ध होते पिता..... (2)

वक्त के साथ वृद्ध होते पिता,
तुम्हें देखकर,
सभी घड़ियाँ तोड़ने का मन करता है,
ये जो छोटी मुश्किलें
तुम्हारे बड़े जीवट को पस्त करने लगी हैं,
अपने सब सपनों में
तुम्हारी उम्र सहेजने का मन करता है,
अब बहुत से काम मैं कर सकता हूँ,
जो तुम नहीं कर पाते,
तो ये सारी कामयाबी फेंकने का मन करता है,
देर से लौटने पर अब
तुम क्यों नहीं पूछते देरी का कारण,
तुम्हें बहुत से जवाब देने का मन करता है,
तुम्हीं मेरे नायक हो
और सफलताओं के सर्वोच्च प्रतिरूप,
नहीं अच्छा लगता अपने पैर में तुम्हारे जूते पहनना,
तुम्हें वही हिम्मती जवान देखने का मन करता है,
चश्मे के पीछे से झाँकती,
तुम्हारी सिकुड़ी मगर खूबसूरत आँखें,
अख़बार पढ़ती हुई नहीं,
ख्वाब देखती हुई अच्छी लगती हैं,
एक प्यारी-सी शर्त लगाएँ आओ फिर,
सब शर्तों में तुमसे हारने का मन करता है,
तुमसे छिपकर अब कुछ बातें
आहिस्ता होती हैं,
घर में अब कुछ हँसी ठहाके
आहिस्ता होते हैं,
आओ मिलकर हँसें, खेलें खेल पुराने,
हँसते हँसते तुम्हारी गोदी में सिर रखकर,
घंटों रोने का मन करता है,
हर एक कहानी झूठी है,
सब दादी नानी झूठी हैं,
सच वो है बस,
जो तुम बोलो और मैं सुन लूँ,
एक नई कहानी सुनते सुनते
हर रात तुम्हारे पाँव दबाने का मन करता है,
तुम्हारी चुप्पी का यह हर क्षण
एक एक युग से भी लम्बा है,
पुरानी डायरी को खोलो अब,
कुछ गीत तुम्हारे सुनने का मन करता है,
तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अंधेरा हो,
तुममें अब भी शक्ति है,
जीतने की, उड़ने की,
तुममें अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की,
कभी घूमने का मन करे तो बताना,
तुम्हारे साथ पैदल चाँद तक चलने का मन करता है।

वृद्ध होते पिता....

वक़्त के साथ वृद्व होते पिता,
आप को देखकर,
सभी घडियां तोड़ने का मन करता है,
ये जो छोटी मुश्किलें,
आपके बड़े जीवट को पस्त करने लगी है,
अपने सब सपनों मे,
आपकी उम्र सहेजने का मन करता है,
अब बहुत से काम मैं कर सकता हूँ,
जो आप नहीं कर पाते,
तो ये सारी कामयाबी फेंकने का मन करता है,
आप से छिपकर अब कुछ बातें
आहिस्ता होती है,
घर मे कुछ हँसी ठहाके
आहिस्ता होते है,
आओ मिलकर खूब हँसे
हँसते हँसते आपकी गोदी मे सिर रखकर,
घंटो रोने का मन करता है,
हर एक कहानी झूंठी है,
सब दादी नानी झूंठी है,
सच तो है बस,
जो आप बोलो और मैं सुन लूँ,
एक नई कहानी सुनते सुनते,
हर रात आपके पाँव दबाने का मन करता है,
आप चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
आप ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
आप जागो तो सवेरा है,
आप सो जाओ तो अँधेरा है,
आप मे अब भी शक्ति है,
जीतने की उड़ने की,
आप मे अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की,
कभी घूमने का मन करे तो बताना,
आप के साथ पैदल,
चाँद तक चलने का मन करता है।।

पिता: प्राण:

पिता: प्राण:
.
पिता हैं एक वृक्ष ,
छत्र -छाया में जिसकी ,
सुकून पाएं हम।

पिता हैं एक आधार ,
सम्बल पाकर जिनका ,
सुरक्षित रहें हम।

पिता हैं एक शक्ति -पुंज ,
संचरित होकर उनसे ,
बलवान बने हम।

पिता हैं प्रेरणा भी ,
धारण कर उनका मार्ग ,
जीवन को सफल करे हम।

पिता हैं ज्ञान – संस्कार भी ,
आदर्शों पर उनके चलकर ,
मानव कहलाये हम।

पिता हैं हमारे सबसे अच्छे मित्र ,
हमराज़, हमदर्द ,हमराह भी ,
मार्ग -दर्शन पाकर जिनकी ,
संघर्षों से विजय पाएं हम।

पिता की अंगुली पकड़ ही तो ,
हमने चलना सीखा।
पिता की आँखों से ही दुनिया को ,
हमने देखना सीखा।
महसूस कर त्याग -बलिदान उनका ,
क्यों न उनके समक्ष शीश झुकाएं हम।

पिता है तो सब कुछ है ,
जीवन है ,और जीवन का आनंद है।
पिता नहीं तो कुछ भी नहीं।
पिता का मूल्य उनसे पूछो ,
जिनके पिता नहीं.
क्योंकि पिता हैं बच्चों के लिए अनमोल।
दुनिया की कोई दौलत नहीं.
तो क्यों न आज के शुभ दिन ,
अपने पिता को शत-शत नमन करे हम।
HAPPY FATHER'S DAY.

Saturday, 20 June 2015

For my sweetheart....

Thanks for making me a Father

At first glance you took my breath away.
And with your smile. My heart.
A simple hello and I was yours.
You had me from the start.

With hand-in-hand you set my path.
Our future painted with your lips.
A highway paved with loving caresses.
On which I've taken many trips.

You changed a child into a man.
And made foolishness retreat.
Then replaced it with maturity.
And children at my feet.

You took the days of loneliness.
Of which I was completely unaware.
And filled them with companionship.
In this lifetime that we share.

It hasn't always been easy.
All roads have ruts and curves.
But each mile's been worth traveling.
Some much more, than I deserve.

Sometimes; with stabbing daggers in our words.
We've caused each other pain.
That turned our heads into a cloud.
And caused our eyes to rain.

But good days, have greater numbers.
And far outweigh the bad.
And I'm thankful for each and every one.
I'm called Sweetheart and a 'Dad.'
.
HAPPY FATHER'S DAY MY LIFE.....
I LOVE YOU, NOW & FOREVER.